
कल तक मैं खुद से पूछता था...
“क्या मैं भी बदल सकता हूँ?”
फिर एक दिन आईने में देखा...
चेहरा थका हुआ था,
लेकिन आँखों में हार नहीं थी।
तभी समझ आया...
हालात बड़े नहीं होते,
हौसला बड़ा होना चाहिए।
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जिस रात कोई साथ नहीं था,
उस रात खुद का हाथ पकड़ा...
जिस दिन दुनिया ने कहा “नहीं,”
उसी दिन मैंने कहा—
“अब करके दिखाऊँगा।”
हद से पार जाना है!
नाम अपना बनाना है!
आज जो खड़े हैं रास्ते में,
कल उनको पीछे छोड़ जाना है!
हद से पार!
हद से पार!
दिल में आग, आँखों में ख्वाब!
गिरकर भी उठना है,
रुकना नहीं जनाब!
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मेरी जेब थी खाली,
पर इरादे करोड़ों के,
लोग थे हँसते,
मैं सपने देखता था रातों में।
किस्मत ने कहा—“रुक जा,”
मैंने कहा—“देख लेना!”
वक्त ने कहा—“तू कौन?”
मैंने कहा—“नाम लिख लेना!”
मैं गिरा? हाँ!
पर वहीं पड़ा? नहीं!
मैं हारा? हाँ!
पर हार माना? नहीं!
हर चोट ने सिखाया,
हर दर्द ने बनाया,
जिस जिंदगी ने तोड़ा,
उसी ने मुझे उठाया!
अब भूख वही है,
बस मंज़िल बड़ी है...
कल जो कमी थी,
आज वही मेरी ताकत खड़ी है!
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हद से पार!
हद से पार!
अब नहीं रुकना एक बार!
आज अगर तू अकेला है,
कल होगा अपना संसार!
हद से पार!
हद से पार!
मेहनत होगी हथियार!
तू खुद पे यकीन रख,
बदल जाएगा पूरा संसार!
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कभी माँ ने पूछा था—
“बेटा, कब आएगा वो दिन?”
मैंने कहा था—
“माँ... थोड़ा वक्त लगेगा,
लेकिन आएगा ज़रूर।”
आज...
वो दिन सामने खड़ा है।
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अब देख...
वही लड़का,
वही आँखें,
बस कहानी बदल गई।
छोटी सी छत से निकला था,
आज अपनी छत खड़ी है।
गाड़ी अपनी,
बंगला अपना,
नाम अपना,
शान अपनी!
लेकिन सबसे बड़ी जीत—
माँ के चेहरे की मुस्कान अपनी।
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हद से पार!
अब जाना है हद से पार!
जो सपना देखा आँखों ने,
करना है वो साकार!
रुकना नहीं!
झुकना नहीं!
खुद से कभी हारना नहीं!
आज तेरा वक्त नहीं है?
तो क्या हुआ भाई—
वक्त का इंतज़ार मत कर...
अपना वक्त खुद बना!
हद से पार! 🔥