
सुनो श्याम प्यारे, विनती हमारी,
तरसत नैनन दरस तुम्हारी।
आओ साँवरे, देर न कीजो,
बिन तुम प्राणन रही न हमारी॥
किसी रूप धरि अब आओ गिरधारी,
दीनन के तुम हो रखवारे।
करत पुकार सुनो बनवारी,
दुख हर लीजो नाथ हमारे॥
सुनाओ हमें वो मधुर मुरलिया,
जाकी तान लुभायो ब्रज की गइया।
वैसी प्रीत हियरा में जागे,
भक्ति रस बरसाओ रसिया॥
फिरि कबहुँ यशोदा डाँट लगावे,
नंदलाल माखन चुरावे।
वो नटखट छवि फिरि दिखलाओ,
हँसि-हँसि सब जग हरषावे॥
राधा संग श्याम अटूट प्रीति,
दूजौ तन पर एकै रीति।
जुदा भए पर संगहि रहैं,
जग जपे ‘राधे-श्याम’ प्रीति॥
हमका सिखाओ नेह निभावन,
प्रेम पंथ पै चलन सिखावन।
लीला तुम्हारी जग सुधरावे,
मन मंदिर में ज्योत जलावन॥
अब तो आओ, देर न कीजो,
दीनन पर कुछ कृपा कीजो।
तरसत नैनन दरस तुम्हारी,
सुनो श्याम प्यारे, विनती हमारी॥