
माटी के रंग मं, रंग गे रे मोर गाँव
मांदर बाजे रे, गूंजे चारों ठाँव
जंगल हमर माई, धरती हमर दाई
बस्तर के माटी ला, माथे मं लगाई
हो रे... हो रे...
मांदर बाजे हो रे
नाचे गाँव के लोग
झूमे सारा लोक
हो रे... हो रे...
हमर पहचान हे
बस्तर के धरती मं
हमर प्राण हे
साल के डार हिले, पवन धीरे-धीरे
महुआ के खुशबू आवे, जंगल के तीरे
बुजुर्गन के बोली, अमृत जइसन लागे
पुरखा के रीत ला, मन मं सब जागे
हो रे... हो रे...
मांदर बाजे हो रे
नाचे गाँव के लोग
झूमे सारा लोक
हो रे... हो रे...
हमर पहचान हे
बस्तर के धरती मं
हमर प्राण हे
पुरखा के निशानी
मन मं बस जाथे
सूखत पत्ता जइसन
याद ना झराथे
हाथ मं हाथ धरके
हम संग चलबो
रीत के आग ला
पीढ़ी ले बढ़ाबो
हो रे... हो रे...
मांदर बाजे हो रे
नाचे गाँव के लोग
झूमे सारा लोक
हो रे... हो रे...
हमर पहचान हे
बस्तर के धरती मं
हमर प्राण हे