
जब हर तरफ़ अँधेरा हो,
जब हौसला भी थकने लगे,
भीतर से एक पुकार उठे—
उठ, अभी संग्राम बाकी है!
जय बजरंगबली, बोल हनुमान!
राम के दूत, महाबली हनुमान!
जिस दिल में बसता तेरा नाम,
उस दिल को छू न पाए तूफ़ान!
जय श्रीराम, जय हनुमान!
गूँजे धरती, गूँजे आसमान!
पवन-वेग से राह बनाते,
पर्वत भी शीश झुकाते,
राम-भक्ति तेरा सच्चा गहना,
चरणों में मन, यही है कहना।
न चाह यश की, न सम्मान,
राम-नाम ही तेरा अभिमान।
जय बजरंगबली, बोल हनुमान!
राम के दूत, महाबली हनुमान!
जिस दिल में बसता तेरा नाम,
उस दिल को छू न पाए तूफ़ान!
जय श्रीराम, जय हनुमान!
गूँजे धरती, गूँजे आसमान!
मुश्किल आई, तू अडिग रहा,
जग जब थका, तू जूझता रहा,
जहाँ कोई कह दे, “अब नहीं,”
बजरंगी बोले, “रुकना नहीं!”
सागर आगे, फिर भी बढ़े,
असंभव के द्वार स्वयं खुलें।
नाम तुम्हारा साँसों में,
राम हमारे विश्वासों में,
डर की दीवारें टूटें आज,
तेरी कृपा से जागे साहस।
जय बजरंगबली, बोल हनुमान!
राम के दूत, महाबली हनुमान!
जिस दिल में बसता तेरा नाम,
उस दिल को छू न पाए तूफ़ान!
जय श्रीराम, जय हनुमान!
गूँजे धरती, गूँजे आसमान!
जय बजरंगबली!
जय हनुमान!