
हाय रे मोर दिलवा…
कइसन खेल खेललस किस्मत…
दीपक के सच्चा प्यार के,
आज बस याद बचल हे…
दीपक रे दीपक, तोर दिल काहे बदल गेल रे,
सच्चा प्यार करलीं, फिर भी काहे छोड़ गेल रे।
तोरे बिना मोर दुनिया सूना-सूना लागे,
बेवफा बनके तू मोर दिलवा तोड़ गेल रे…
तोरे संग देखलीं सपना हजार,
तोरे खातिर धड़कल मोर दिल बार-बार।
कहले रहलीं—“साथ तोर जिंदगी भर देबो,”
फिर काहे छोड़ गेलू, मोला अकेला कर के यार?
गुमला के रस्ता में तोर याद आवे,
चुपके-चुपके मोर नैना नीर बहावे।
जतना भुलाय के चाहीं, ओतने याद सतावे,
तोर बिना ई मनवा कहीं चैन न पावे।
दीपक रे दीपक, तोर दिल काहे बदल गेल रे,
सच्चा प्यार करलीं, फिर भी काहे छोड़ गेल रे।
तोरे बिना मोर दुनिया सूना-सूना लागे,
बेवफा बनके तू मोर दिलवा तोड़ गेल रे…
हाट-बाजार में तोर चेहरा खोजीं,
पुरनका बात सोच के रात भर रोईं।
तोर दिहल चिट्ठी अबो सहेज के रखलीं,
फाटल दिल के पीर केकरा से कहीँ?
तोरे हँसी के गूँज घरवा में रह गेल,
खाली अँगना में सावन ठहर गेल।
तू खुश रहबू, एतने दुआ देथीं,
मोर हिस्सा के सुख जाने कहाँ बह गेल।
जदि लौट के अइबू, सवाल न करबो,
टूटल भरोसा फेरो जोड़ न सकबो।
दिल तो आजो तोरे नामे धड़के,
बाकी उमर तोर राह न तकबो…
दीपक रे दीपक, तोर दिल काहे बदल गेल रे,
सच्चा प्यार करलीं, फिर भी काहे छोड़ गेल रे।
तोरे बिना मोर दुनिया सूना-सूना लागे,
बेवफा बनके तू मोर दिलवा तोड़ गेल रे…
हाय रे मोर दिलवा…
गुमला के रस्ता याद करावे…
दीपक के सच्चा प्यार के,
आज बस याद बचल हे…