
भए प्रकट कृपाला
दीनदयाला
कौसल्या हितकारी
हरषित महतारी
मुनि मन हारी
अद्भुत रूप बिहारी
तेरे चरणों की धूलि
लगे तो खुल जाए
मन की हर बीमारी
राम लला मेरे घर भी आओ
मन-मंदिर उजियारा
राम लला मेरे घर भी आओ
मिट जाए अँधियारा
राम लला मेरे घर भी आओ
जीवन हो सुख सारा
जब-जब जग पर संकट छाया
तुमने दिया सहारा
दीन-दुखी की लाज बचाई
बनकर पालनहारा
तेरे नाम का दीप जले तो
टूटे हर अँधियारा
शबरी ने जब नाम पुकारा
मीठा फल स्वीकारा
केवट ने जो हाथ बढ़ाया
भव से पार उतारा
अहिल्या की सूनी राहों में
तुमने रंग संवारा
राम लला मेरे घर भी आओ
मन-मंदिर उजियारा
राम लला मेरे घर भी आओ
मिट जाए अँधियारा
राम लला मेरे घर भी आओ
जीवन हो सुख सारा
हम भी तेरे द्वार खड़े हैं
लेकर मन की माला
भक्ति का एक दीप जला दो
कर दो घर मतवाला
दुख की शिला पर हाथ रखो तो
खिल उठे उजियाला
राम लला मेरे घर भी आओ
मन-मंदिर उजियारा
राम लला मेरे घर भी आओ
मिट जाए अँधियारा
राम लला मेरे घर भी आओ
जीवन हो सुख सारा