
जय जय श्री श्याम
जय श्री श्याम।
गुरु चरणों की वंदना करूँ, मन में लाऊँ ध्यान,
सच्चिदानंद श्याम प्रभु, तुम ही मेरे प्राण।
वासुदेव के रूप में तुम, बसते हो हर श्वास,
भक्तों के अंतर में सदा, करते प्रेम निवास।
नंद दुलारे, माधव मोहन, गोपाल मुरारी,
ब्रज के प्यारे श्याम सलोने, गिरिधर बनवारी।
गोवर्धनधारी दीनदयाल, हरिगोविंद तुम्हारा नाम,
बालमुकुंद करुणा सागर, हरते सबके ग्राम।
जय जय श्री श्याम
जय श्री श्याम।
जब-जब भक्त पुकारे तुमको, दौड़े आते श्याम,
कभी सरल, कभी विकराल, करते सबका काम।
केशव, माधव, जगदीश प्रभु, तुम जग के रखवारे,
शेष-महेश भी थक जाएँ, गाते गुण तुम्हारे।
नारद, शारद, ऋषि-मुनि सब, जपते नाम तुम्हारा,
हर युग में अवतार लेकर, करते उद्धार हमारा।
श्याम चरण में मन को धर दूँ, यही मेरी आस,
तीनों लोकों में गूँज रहा, तेरा पावन प्रकाश।
जय जय श्री श्याम
जय श्री श्याम।
श्याम नाम का ले सहारा, दुख सारे मिट जाएँ,
मन में शांति, जीवन सुख से, प्रभु कृपा बरसाएँ।
मोर मुकुट सिर ऊपर शोभे, पीतांबर तन साज,
बैजंती माला गले विराजे, सुंदर अनुपम राज।
दिन-रैन तेरा ध्यान करूँ मैं, हर पल तेरा जाप,
तेरी कृपा से मिट जाएँ, जीवन के संताप।
श्याम भक्तों के तुम रक्षक, हर संकट के साथी,
जो भी तेरी शरण में आए, पावे राह सुहाती।
जय जय श्री श्याम
जय श्री श्याम।
मथुरा से लेकर खाटू धाम, गूँजे तेरा नाम,
दिल्ली, उत्तर प्रदेश में भी, गाते सब श्री श्याम।
बंसी की मधुर तान सुनाकर, सबको पास बुलाते,
भय हर लेते, कष्ट मिटाते, मनवांछित फल दिलाते।
हाथ जोड़ कर विनती मेरी, सुन लो हे भगवान,
अपनी शरण में रख लो मुझको, देना मुझको ज्ञान।
खाटू नगरी पावन धाम, दर्शन तेरे न्यारे,
एक झलक जो मिल जाए तो, जीवन हो उजियारे।
जय जय श्री श्याम
जय श्री श्याम।
बार-बार मैं शीश नवाऊँ, चरणों में बलिहार,
श्याम कृपा से पार लगाओ, मेरा यह संसार।
जय जय श्री श्याम प्रभु, जय खाटू के धाम,
भक्तों के तुम हो सहारा, जय-जय श्री श्याम।
जय जय श्री श्याम
जय श्री श्याम।