
गूँज उठा आकाश,
जाग उठा बलवान,
राम नाम की गर्जना से
काँप उठा जहान!
धधक उठे अंगार,
लहराए लाल निशान,
रण में उतरे महावीर,
जय बोलो हनुमान!
जय हनुमान!
जय हनुमान!
जय-जय बजरंगबली!
गरज उठे बजरंग,
गूँज उठे जयकार!
रामदूत के नाम से
काँपे अत्याचार!
गदा उठे जब हाथ में,
जागे महाबल आज!
पवनसुत के तेज से
मिट जाए हर राज!
जय बजरंगबली!
जय बजरंगबली!
जय महावीर हनुमान!
सागर की सीमा क्या जाने,
जिसके मन में राम।
पर्वत भी लघु लगने लगे,
जब बढ़े महाबली धाम।
एक छलाँग में नभ को चीरें,
बादल राह बनाएँ।
रामकाज की धुन में महावीर,
दिशा-दिशा छा जाएँ।
वज्र समान विशाल भुजाएँ,
नेत्रों में तेज अपार।
गदा प्रहार की गूँज सुनाकर,
मिटे अधर्म का भार।
राम नाम की ध्वजा उठे,
गूँजे चारों धाम!
जय अंजनी के लाल की,
जय-जय वीर हनुमान!
गरज उठे बजरंग,
गूँज उठे जयकार!
रामदूत के नाम से
काँपे अत्याचार!
गदा उठे जब हाथ में,
जागे महाबल आज!
पवनसुत के तेज से
मिट जाए हर राज!
जब सीमा लाँघे अत्याचार,
जब धर्म पुकार लगाए,
तब रौद्र तेज प्रकट हो ऐसा,
दुष्टों के सिंहासन डगमगाएँ।
ज्वाला बनकर सत्य चमके,
अंधकार सब हार।
हनुमत नाम की गर्जना से,
भागे भय अपार।
नभ में लाल पताका लहराए,
धरती गूँजे नाम।
एक स्वर में जग यह बोले—
जय श्रीराम! जय श्रीराम!
रणभूमि में जब प्राण थमे थे,
छाया था अँधियार।
राम हृदय में पीड़ा गहरी,
दिशा-दिशा लाचार।
औषधि का जब भेद न जाना,
पर्वत उठा लाए।
संजीवनी की शीतल साँसें,
प्राणों में फिर आए।
सेवा जिसकी साधना बनी,
भक्ति जिसका मान।
राम चरण में अर्पित जीवन,
ऐसे महावीर हनुमान!
राम चरणों की भक्ति मिले बस,
यही अमर वरदान।
हृदय जहाँ श्रीराम विराजें,
वहीं हनुमत धाम।
श्वास-श्वास में नाम रहे बस,
श्रीराम... श्रीराम...
गरज उठे बजरंग!
गूँज उठे जयकार!
रामदूत के नाम से
काँपे अत्याचार!
गरज उठे बजरंग!
दहक उठे अंगार!
महावीर के तेज तले
झुक जाए संसार!
जय बजरंगबली!
जय बजरंगबली!
जय महावीर हनुमान!
जय पवनसुत बलवान!
जय रामदूत हनुमान!
जय संकटमोचन हनुमान!
जय श्रीराम!
जय श्रीराम!
भक्ति की यह साधना—
जय श्रीराम!
वीर हनुमत की जय हो—
जय श्रीराम!
कण-कण बोले, प्राण बोले—
जय बजरंगबली!
जय बजरंगबली!
जय बजरंगबली!
जय-जय महावीर हनुमान!
राम... राम... राम...
जय श्रीराम!
जय हनुमान!
जय बजरंगबली!