
चार बोतल पी के टल्ली हो गया मैं,
आज अपनी ही धुन में चल्ली हो गया मैं,
कल तक था सीधा-सादा, आज बदनाम हो गया,
तेरी याद में पीते-पीते मशहूर हो गया मैं।
अरे धीरे-धीरे, कदम संभाल रे,
गली के नुक्कड़ पे सबका सवाल रे,
तेरा नाम आया तो हँस पड़ा मैं,
अपनी ही बातों में खो गया मैं।
चाबी जेब में थी, दरवाज़ा ढूँढ़ता रहा,
चाँद को अपना पुराना यार बोलता रहा,
माँ ने कहा, "बेटा, अब घर आ भी जा",
मैंने कहा, "बस, तेरी याद का आख़िरी जाम भला।"
अरे धीरे-धीरे, कदम संभाल रे,
गली के नुक्कड़ पे सबका सवाल रे,
तेरा नाम आया तो हँस पड़ा मैं,
अपनी ही बातों में खो गया मैं।
सुबह हुई तो सिर ने हिसाब माँगा,
आईने ने मेरा नक़ाब माँगा,
कसम खाई, अब कम ही पियूँगा,
तेरी याद आए तो चाय ही पियूँगा।
चार बोतल पी के टल्ली हो गया मैं,
आज अपनी ही धुन में चल्ली हो गया मैं,
कल तक था सीधा-सादा, आज बदनाम हो गया,
तेरी याद में पीते-पीते मशहूर हो गया मैं।
अब चाय की प्याली, और घर का रास्ता,
तेरी याद रहेगी—पर होश भी ज़रा सा।