
उठो, ऐ मसीह के मुजाहिद, उठो!
दिल में अब डर को जगह मत दो
ईमान की ढाल हाथों में लो
और सच की तलवार को थाम लो
रात कितनी भी घनी हो जाए
उसकी रोशनी से राह मिल जाए
किस बात का खौफ, किस बात का डर?
जब साथ है वो, तो नहीं कोई जहर
कदम बढ़ाओ, आँखें उठाओ
वादा उसका अब दोहराओ
उठो, ऐ मसीह के मुजाहिद, उठो!
उठो, ऐ मसीह के मुजाहिद, उठो!
ईमान की ढाल हाथों में लो
उसकी जीत की खबर अभी लो
किस बात का खौफ, किस बात का डर?
जब साथ है वो, तो फ़तह की खबर!
धूल भरे रास्ते, चोटिल पाँव
फिर भी हम चल दें, उसके नाम
टूटे हुए मन को जोड़ दे वो
सूखे हुए दिल में बीज बो दे वो
हर घाव पर मरहम उसका है
हर हार के ऊपर परचम उसका है
किस बात का खौफ, किस बात का डर?
जब साथ है वो, तो नहीं कोई जहर
कदम बढ़ाओ, आँखें उठाओ
वादा उसका अब दोहराओ
उठो, ऐ मसीह के मुजाहिद, उठो!
उठो, ऐ मसीह के मुजाहिद, उठो!
ईमान की ढाल हाथों में लो
उसकी जीत की खबर अभी लो
किस बात का खौफ, किस बात का डर?
जब साथ है वो, तो फ़तह की खबर!
अब पीछे नहीं, अब रुकना नहीं
जो बुलाया गया, वो झुकना नहीं
उसके नाम पर हम एक हो गए
उसके संग चलकर हम नेक हो गए
उठो, ऐ मसीह के मुजाहिद, उठो!
उठो, ऐ मसीह के मुजाहिद, उठो!
ईमान की ढाल हाथों में लो
उसकी जीत की खबर अभी लो
किस बात का खौफ, किस बात का डर?
जब साथ है वो, तो फ़तह की खबर!