
जय हनुमंत संत हितकारी,
सुन लीजे प्रभु अरज हमारी॥
जन के संकट पल में हरते,
भक्तों के जीवन में बसते॥
ॐ श्री हनुमते नमः…
ॐ श्री हनुमते नमः…
जब-जब धरती पर संकट आया,
तब-तब तूने ध्वज लहराया॥
अंधियारे में दीप जलाए,
डूबों को तूने पार लगाए॥
तेरे नाम से भय मिट जाता,
हर दुखिया हँसना सीख जाता॥
जय-जय पवनसुत बलवाना,
जय संकट मोचन हनुमाना॥
सागर लांघ लंका पहुँचाए,
सीता माता का संदेशा लाए॥
रावण का अभिमान जलाया,
राम नाम का डंका बजाया॥
तेरी गदा जहाँ लहराती,
काल भी राह बदल कर जाती॥
भक्तों के तू प्राण सहारा,
जय बजरंगी वीर हमारा॥
जब लक्ष्मण पर संकट आया,
द्रोणगिरि पर्वत उठा लाया॥
प्राणों में फिर ज्योति जगाई,
रामभक्त की लाज बचाई॥
तेरी शक्ति अपरम्पारा,
तेरे जैसा ना जग सारा॥
जो भी तेरा ध्यान लगाता,
जीवन में सुख-शांति पाता॥
भूत-पिशाच निकट ना आवे,
महावीर जब नाम सुनावे॥
तेरी कृपा जो जन पर होती,
हर विपदा उसकी खोती॥
काली रात भी डर कर भागे,
जहाँ तेरे जयकारे जागे॥
तेरी भक्ति अग्नि समान,
जल जाए हर एक तूफान॥
राम दूत अतुलित बलधामा,
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥
तेरी आँखों में ज्वाला भारी,
फिर भी करुणा सबसे प्यारी॥
तूने दीनों को अपनाया,
रोते मन को हँसना सिखाया॥
तेरे चरणों में सुख मिलता,
हर संकट पल में है टलता॥
जंगल-पर्वत राह न रोके,
तेरे आगे काल भी झुके॥
तेरे नाम की शक्ति निराली,
हर लेती हर पीड़ा काली॥
जो भी सच्चे मन से ध्यावे,
उसके कष्ट सभी मिट जावे॥
तेरा नाम अमृत की धारा,
जीवन बन जाए उजियारा॥
तेरे भक्त कभी ना हारें,
तू रखवाला बनकर तारे॥
राम नाम की ज्योति जलाकर,
चलता तू हर दिल में आकर॥
संकट में जो तुझको पुकारे,
तू दौड़ा आए पल में न्यारे॥
तेरे जैसा दानी ना कोई,
भक्तों की नैया तू ही खोई॥
अब तो द्वार तिहारे आए,
दुख के बादल मन पर छाए॥
अपनी कृपा दृष्टि बरसाओ,
सोए भाग्य हमारे जगाओ॥
रामभक्ति का दीप जला दो,
मन मंदिर में प्रेम बसा दो॥
जय-जय वीर महाबलधारी,
संकट मोचन मंगलकारी॥
पवन तनय संकट हरन,
मंगल मूरति रूप॥
राम लखन सीता सहित,
हृदय बसहु सुर