
उनके अनुशासन में हर नाम अटल,
उनके निरीक्षण में हर काम सफल।
उनका नेतृत्व रहा सदा प्रबल,
उनके व्यक्तित्व से मिला सबको संबल।
एक संस्थान का भार ही नहीं,
देश के सपनों का मान लिए,
आने वाले कल की खातिर,
हर दिन नई उड़ान लिए।
आपकी छाँव में सीखा हमने,
आगे बढ़ना, सपने बुनना,
आपके स्नेह और मार्गदर्शन से,
हर मुश्किल में दृढ़ होकर चलना।
विदा के इन अंतिम पलों में,
दिल बस इतना कहता है—
आपका दिया हुआ संबल,
हम सबके संग रहता है।
कॉलेज से विदाई के क्षणों में भी,
आप इसे सँवारते रहे,
हर कोने में अपनी मेहनत के,
रंग नए भरते रहे।
ममत्व का रिश्ता निभाकर,
हर छात्र को अपनाया,
वात्सल्य भरे अपने हाथों से,
हमको राह दिखाया।
आपकी डाँट में छिपा दुलार,
हमने हर बार पहचाना,
उस सच्चे ममत्व के आगे,
मन ने सिर झुकाना जाना।
आपकी छाँव में सीखा हमने,
आगे बढ़ना, सपने बुनना,
आपके स्नेह और मार्गदर्शन से,
हर मुश्किल में दृढ़ होकर चलना।
विदा के इन अंतिम पलों में,
दिल बस इतना कहता है—
आपका दिया हुआ संबल,
हम सबके संग रहता है।
आपके कर्मों की छत्रछाया में,
हम फूलों जैसे पले,
आपने विश्वास से सींचा,
तो अपने पथ पर चले।
जो संस्कार आपने दिए,
वे जीवन भर साथ रहेंगे,
आपकी सीख के दीपक से,
हम राहें रोशन करेंगे।
आपकी छाँव में सीखा हमने,
आगे बढ़ना, सपने बुनना,
आपके स्नेह और मार्गदर्शन से,
हर मुश्किल में दृढ़ होकर चलना।
आज विदा कहते हैं, लेकिन,
आभार कभी कम न होगा,
आपका दिया हुआ संबल,
हमारे दिल में सदा रहेगा।
आपकी छाँव में पले हैं हम,
फूलों की तरह…
आपकी सीख लिए चलेंगे,
जीवन भर हम…