
देखिए छोटी शीतल सच्ची
सब मना रहे जन्माष्टमी
सब मना रहे जन्माष्टमी
आप क्यों छिपकली जैसे लेटी हैं जी?
उठिए साक्षी जी, उठिए ना जी
आज है प्यारी जन्माष्टमी
कृष्ण कन्हैया आए हैं जी
फिर भी आप क्यों नाराज़ हैं जी?
सब मना रहे जन्माष्टमी
सब मना रहे जन्माष्टमी
आप क्यों छिपकली जैसे लेटी हैं जी?
सब मना रहे जन्माष्टमी
सब मना रहे जन्माष्टमी
आप क्यों नाराज़ हैं जी?
माखन-मिश्री थाल सजाया
कान्हा जी को आज जगाया
साक्षी जी को किसने मनाया?
क्यों अभी तक मुँह है फुलाया?
हँसो जरा, देखो तो सही
घर में आई है रौनक वही
राधा जैसी मुस्कान लाओ
आज तो बस तुम साथ निभाओ
सब मना रहे जन्माष्टमी
सब मना रहे जन्माष्टमी
आप क्यों छिपकली जैसे लेटी हैं जी?
सब मना रहे जन्माष्टमी
सब मना रहे जन्माष्टमी
आप क्यों नाराज़ हैं जी?
ओ साक्षी जी, ओ साक्षी जी
अब तो मानो बात हमारी
माखन चख लो, मटकी थामो
आज है बस जय कन्हैया की
सब मना रहे जन्माष्टमी
सब मना रहे जन्माष्टमी
आप क्यों छिपकली जैसे लेटी हैं जी?
सब मना रहे जन्माष्टमी
सब मना रहे जन्माष्टमी
आप क्यों नाराज़ हैं जी?