
सुबह के बज गए बारह बज गए एक,
बिस्तर पर पड़ा है टोका जी को देख!
सैफ नाम है दुनिया में, टोका नाम से जाने,
सोने के अलावा इसको आते नहीं बहाने!
ओ टोका जी! ओ टोका जी!
आलस की मूरत, टोका जी!
काम का नाम सुनो तो आँखें बंद कर लें,
सोते-सोते पूरी दुनिया फ़तह ये कर लें!
ओ सैफ भाई, टोका जी!
करवट बदलने में भी आता है पसीना,
बिस्तर ही है इनका असली मदीना!
चाय भी मंगवाते हैं बिस्तर पे लेटे,
काम धाम छोड़ो, बस आराम करो बेटे!
ओ टोका जी! ओ टोका जी!
आलस की मूरत, टोका जी!
काम का नाम सुनो तो आँखें बंद कर लें,
सोते-सोते पूरी दुनिया फ़तह ये कर लें!
ओ सैफ भाई, टोका जी!